- यहां पर चलती है जहरीले सांपो कि हुकूमत, बंद है इंसान का जाना
सांबा जिले की भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ऐतिहासिक बाबा चमलियाल मेले में हर साल हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मजार पर माथा टेकने के लिए राज्य के अलावा बाहर से भी लोग आते हैं। इस मेले में आने वाले पाकिस्तानी रेंजर अपने साथ दरगाह पर चढ़ाने के लिए चादर लाते हैं। वे खुद दरगाह पर चादर चढ़ाकर सिर झुकाते हैं। लौटते समय पाक रेंजर ट्रैक्टर के साथ पानी के टैंकर तथा मिट्टी की ट्रालियां ले जाते हैं। पानी को ‘शर्बत’ तथा मिट्टी को ‘शक्कर’ के नाम से पुकारा जाता है।
इस सीमा चौकी पर एक मजार होने से मेले के साथ धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हैं। कहा जाता है कि जिस कुएं का पानी सीमा पार भेजा जाता है, उसमें गंधक की मात्रा बहुत अधिक है। इस विशेष स्थान की मिट्टी में कुछ ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जो चर्म रोगों के इलाज में कारगर होते हैं। इसलिए इस पानी तथा मिट्टी का लेप बना चर्म रोगी शरीर पर लगाकर चर्म रोगों से मुक्ति पाते हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज पचास गज पीछे यह मेला लगता है। दिन में कई टैंकर पानी तथा कई ट्रालियां मिट्टी उस ओर भिजवाई जाती हैं। BSF तथा पाकिस्तानी रेंजर इन रिवाजों को आज भी निभाते आ रहे हैं।
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