1. गर्भावस्था के दौरान भी कई महिलाओं को वजाइना से ब्लीडिंग होने की तकलीफ होती है। कई औरतों को प्रेगनेंसी के शुरुवाती महीनो में स्पॉटिंग या हल्की ब्लीडिंग की परेशानी होती है।
2. क्या आप यौन संचारित रोगों के बारे में जानते हैं ? यदि आप किसी यौन संचारित रोग से पीड़ित हैं जैसे गान्रीया, च्लाम्य्डिया, एचपीवी आदि तो आपको वजाइनल ब्लीडिंग हो सकती है।
3. गर्भनिरोधक उपकरण यदि आपने गर्भ निरोधक के रूप में वजाइना में इंट्रयूटरिन डिवाइस लगवाया है तो भी कभी-कभी आपको ब्लीडिंग की परेशानी हो सकती है।
4. कई बार यदि महिलाएं कुछ स्ट्रांग दवाईयां खा लेती हैं। जैसे की गर्भ निरोधक गोलियाँ और ब्लड थिनर्स तो इस कारण से भी हार्मोंस में असंतुलन होता है, जो वजाइनल ब्लीडिंग की समस्या को पैदा करता है।
5. थायराइड ग्रंथि का कम सक्रिय होना भी ब्लीडिंग की वजह बनता है, क्योंकि इसके कारण हार्मोंस में असंतुलन होता है जिसके कारण वजाइनल ब्लीडिंग होती है।
6. यूटीआई यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (मूत्र मार्ग में संक्रमण) भी वजाइनल ब्लीडिंग का एक कारण हो सकता है।
7. पीसीओएस कई बार ऐसी महिलायें जो पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम से ग्रसित होती हैं उनमें हार्मोंस के उतार चढ़ाव के कारण पीरियड्स न होते हुए भी वजाइना से ब्लीडिंग होने की समस्या हो सकती है।
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