कितना सेफ है आपका स्कार्फ, दूर करे अपने वहम


अगर आप अपना मुंह स्कार्फ से ढक लो और सोचो पॉल्यूशन से बचाव हो गया तो यह आपका वहम है। दरअसल, हकीकत कुछ और ही है। ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में चेहरा रूमाल या स्कार्फ से ढक कर मान लिया जाता है कि पॉल्यूशन का अब असर नहीं होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। 

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एक नए शोध में सामने आया है कि देश व अन्य एशियाई देशों में धूल के कणों से बचाव के लिए अक्सर रूमाल या स्कॉर्फ का इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह के कपड़े कुछ हद तक ही प्रदूषण से बचाव करते हैं। इनकी तुलना में बाजार में मिलने वाले मास्क बेहतर हैं। 

इस तरह के मास्क पहनने वाले लोग अपने आपको सुरक्षित महसूस करते हैं। कपड़ों से बने मास्क ने 80-90 फीसदी कृत्रिम कणों तथा डीजल गाडिय़ों से निकलने वाले लगभग 57 फीसदी हानिकारक कणों को दूर रखते हैं। 
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वहीं मास्क के रूप में इस्तेमाल लाए गए रूमाल या स्कार्फ 2.5 माइक्रोमीटर से कम आकार के कणों से बचाने में बेहद सीमित तौर पर लाभकारी हैं। यह एक्सपोजर साइंस एंड एन्वायरमेंटल एपिडेमियोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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