किशोरावस्था में लड़कियों कि समस्या


बचपन में मासूमियत और बचपन से बाहर निकलते ही इंसान किशोरावस्था में पहुंच जाता है। किशोरावस्था एक ऐसा पल होता है जहा इंसान न तो बच्चा रहता है और न ही पूरी तरह जवान। लोगो का मानना है कि इस अवस्था में लोग जवानी के ओर बढ़ रहे बच्चे बड़े चंचल रहते है। मगर आपको बता दें कि एक सर्वे के मुताबिक ऐसा कुछ नहीं है। खास कर के किशोरावस्था में लडकिया चंचल नहीं होती बल्कि मानसिक विकार से ग्रस्त होने के कगार पर होती है। चलिए आपको बतातें है आखिर क्या है इस बात के पीछे कि वजह।

सिडनी के ब्लैक डॉग इंस्टीट्यूट और मेलबर्न के मिशन ऑस्ट्रेलिया के एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 14 से 17 साल कि लड़कियां और लड़कों में मनोवैज्ञानिक समस्याओं से पीड़ित होने के संकेत सामने आया है। आपको यह बात जरूर हैरान कर देगी कि सर्वे के मुताबिक लड़कों मुकाबले लड़कियां मनोवैज्ञानिक समस्याओं से ज्यादा पीड़ित हैं। सर्वे के मुताबिक 13.9 फीसदी लड़को के मुकाबले 27.5 फीसदी लड़कियां इस से ग्रस्त हैं। अब यह सर्वे टीम इस बात के खोज में लगी है कि आखिर ये कौन सी बाते है जिस के कारण मनोवैज्ञानिक समस्याओं से ग्रस्त हो रहे है आज कल के किशोर। 

शोधकर्ताओं ने बताया है कि सर्वे से यह बात सामने आई है कि किशोरियां मानसिक रोगों की चपेट में ज्यादा आती हैं। ऐसा क्यों हो रहा है इसकी वजहों पर ध्यान दिया जा रहा है। आपको बता दें कि किशोरों के मुकाबले किशोरियों को इस अवस्था में अनेक नए बदलाव का सामना करना पड़ता हैं।

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