कोरोना जैसी महामारी के दौर में भी सियासत का खेल जारी है। चुनाव खत्म होने का इंतजार देख रही तेल कम्पनियों ने 4 मई से अपने रंग दिखाने शुरू किए जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। कोरोना संकट के दौर में तेल कंपनियों ने 34 दिन से पेट्रोल डीज़ल के दाम में वृद्धि शुरु कर दी है। पिछले 34 दिन में पेट्रोल 4.82 रुपए प्रति लीटर और डीजल 5.61 रुपए प्रति लीटर बढ़ चुका है।
पेट्रोल के दाम 101 रूपए को पार करते हुए 101.59 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं डीज़ल भी 94 रुपए के पार यानी 94.81 रुपए प्रति लीटर तक आ गया है। दरअसल केंद्र सरकार सेंट्रल एक्साइज और राज्य सरकार वैट के रूप में पिछले 14 महीने में कई बार वृद्धि कर चुके हैं। हालांकि राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल में 2 फ़ीसदी की वैट में राहत भी दी थी लेकिन यह राहत ऊंट के मुंह में जीरे के समान रही।
बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनाव आने से ठीक पहले तो पेट्रोल डीजल के दाम आंशिक रूप से बढ़ते रहे। इसके बाद सियासी मजबूरी कहें या केंद्र सरकार का इशारा तेल कंपनियों ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कीमतों में वृद्धि को रोक दिया था। अब चुनाव संपन्न होते एक बार फिर वृद्धि का दौर शुरू हो गया है जो कोरोना संकट के दौर में आम आदमी के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।



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