हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर कई तरह के शुभ और अशुभ दोनों तरह की लकीरें बनी हुई होती हैं। इन लकीरों के अतिरिक्त हथेली पर कई तरह के पर्वत भी बने हुए होते हैं। हस्तरेखा शास्त्र में पर्वत की विशेष भूमिका होती है। यह पर्वत अंगुली के नीचे वाले हिस्सों में बने हुए होते हैं। हथेली पर ये पर्वत अलग-अलग ग्रहों के नाम से जाना जाता है जैसे सूर्य पर्वत, शनि पर्वत और गुरु पर्वत। आज हम आपको हथेली पर बने सूर्य पर्वत के बारे में बताएंगे...
हथेली पर सूर्य रेखा के मजबूत होने पर जातकों को नौकरी पेशा के मामलों में ये आसानी से उच्चपद प्राप्त कर लेते हैं लेकिन वह स्थाई रूप से टिक नहीं पाते हालांकि इनमें परिस्थितियों को साहस पूर्वक सामना करने का जज्बा होता है अतः यह जल्दी हार नहीं मानते। ऐसे जातक जिनके सूर्य पर्वत का झुकाव शनि पर्वत की ओर होता है वह पाशविक मनोवृति के स्वार्थी व अपराध में रुचि लेने वाले होते हैं ।
ऐसे जातक जिनके सूर्य पर्वत का झुकाव बुध पर्वत की ओर हो वह ज्योतिष के ज्ञाता, वक्ता, लेखक, राजनीति के क्षेत्र में दखल रखने वाले तथा कला के क्षेत्र से आय अर्जित करने वाले हो सकते हैं ।
जिन जातकों का सूर्य पर्वत दबा हुआ या न के बराबर हो वह जीवन को भार के रूप में ढोते हैं उनके जीवन में चमक दमक एवं आकांक्षाएं कम होती हैं। कमाना खाना व सोना ही उनकी दिनचर्या होती है इस प्रकार के कई जातक मंदबुद्धि भी होते हैं।
इसी प्रकार इस क्षेत्र में क्रॉस का चिन्ह हो तो जातक को कई क्षेत्रों में असफलता देता है। सूर्य से प्रभावित जातक अभिनय, गायन, हास्य, लेखन, चिकित्सा, खेल, इलेक्ट्रॉनिकस, सेल्स, राजनीति, पेंटिंग एवं प्रशासन आदि के क्षेत्र में भारी सफलता अर्जित करते हैं।



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