इतने करोड़ रुपये की मोटी रकम देकर VIVO बनीं थी IPL की प्रायोजक


भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की टी20 टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 13वें एडिशन से पहले टाइटिल प्रायोजक को हटाने का फैसला लिया गया है। चीनी मोबाइल कंपनी वीवो IPL के 2020 संस्करण की प्रायोजक नहीं होगी। BCCI ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी।


साल 2008 में टूर्नामेंट की शुरुआत हुई थी तक से अब तक 12 सीजन हो चुके हैं और वीवो तीसरी टाइटिल प्रायोजक कंपनी है। साल 2008 में पहली बार जब इस टी20 लीग की शुरुआत हुई तो भारतीय रियल स्टेट कंपनी DLF के साथ 5 साल के लिए करार हुआ था। इसके बाद 2013 में अमेरिका की कोल ड्रिंग कंपनी पेप्सी को के साथ 5 साल का करार हुआ। 2017 में चीनी मोबाइल कंपनी वीवो को साथ 5 साल का करार किया गया था।


2008 में DLF ने टूर्नामेंट के साथ 200 करोड़ का करार किया था। 2013 में पेप्सी के साथ 396 करोड़ रुपये में अगले 5 साल के लिए करार किया गया। साल 2017 में 1000 गुना ज्यादा रकम 2199 करोड़ का करार हुआ था।चीनी कंपनी वीवो अगले साल यानी 2021 में प्रायोजक रहेगी और यह अनुबंध 2023 तक चलेगा।


वीवो इंडिया ने 2017 में आइपीएल के मुख्य प्रायोजन अधिकार 2199 करोड़ रुपये में हासिल किए थे। इससे लीग को हर सत्र में उसे करीब 440 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। इस चीनी मोबाइल कंपनी ने सॉफ्ट ड्रिंक वाली दिग्गज कंपनी पेप्सिको को हटाया था, जिसका 2016 में 396 करोड़ रुपये का अनुबंध था।

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