1. एप के नाम पर दें विशेष ध्यान
किसी भी एप्लीकेशन को डाउनलोड करते समय उस एप के नाम पर विशेष ध्यान दें। अधिकतर देखा जाता है कि फर्जी एप का नाम किसी लोकप्रिय एप के नाम की नकल करके रखा जाता है। इससे ऐसी एप के डाउनलोड किए जाने की संभावना बढ़ जाती है। एन के नाम की स्पेलिंग, एप के लोगो के रंग और डिजायन पर ध्यान दें, कई बार फर्जी एप और असली एप के डिजायन में बेहद मामूली अंतर होता है।
2. डेवलपर के नाम को पढ़ें
एक ही नाम की एक से अधिक एप गूगल स्टोर पर मिल जाएंगी। ऐसे में अगर आप एप को डाउनलोड करना चाहते हैं तो बड़ी दुविधा होती है कि कौन सी एप्लीकेशन असली है। इसके लिए एप के डि्क्रिरशन में जाकर डेवलपर के नाम को ध्यान से पढ़ें। कई फर्जी एप बनाने वाले डेवलपर तो असली एप के डेवलपर के नाम की भी नकल कर लेते हैं। इसलिए ध्यान दें कि कहीं डेवलपर के नाम के आगे कोई विशेष संकेत या अक्षर न लिखा हो। साथ ही अक्षरों के बीच में गैप न दिया गया हो। अगर ऐसा है तो संभावना है कि नकली एप बनाने वाले डेवलपर ने यूजर्स को धोखा देने के लिए यह किया हो।
3. रिव्यू और रेटिंग पर दें ध्यान
प्ले स्टोर पर मौजूद सभी एप्लीकेशन पर पब्लिक फीडबैक सिस्टम होता है, यानी आम यूजर उस एप पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। आप जब भी कोई नई एप डाउनलोड करना चाहते हैं तो पहले रिव्यू को ध्यान से पढ़ें। अगर रिव्यू सकारात्मक हों तब ही एप को डाउनलोड करें।
4. एंटीवायरस का करें प्रयोग
अपने फोन को किसी भी फर्जी एप के खतरे से दूर रखने के लिए किसी विश्वसनीय एंटीवायरस का प्रयोग करें। एंटीवायरस होने पर फोन उस एप को डाउनलोड करने पर आपको चेतावनी देगा।
5. थर्ड पार्टी एप स्टोर से रहें दूर

जब भी आपको कोई एप डाउनलोड करनी हो तो किसी भी थर्ड पार्टी एप स्टोर से उसे डाउनलोड करने से बचें। अगर आप एंड्रायड यूजर हैं तो गूगल प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करें, क्योंकि वहां सभी एप की स्क्रूटिनिंग की जाती है।





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