यह हार्मोन अंडाशय में बनता है। इस हार्मोन में असंतुल होने पर यह अंडाणुओं के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यदि इसके स्तर में कमी पाई जाती है तो यह इंफर्टिलिटी (बांझपन) का एक कारण हो सकता है। महिलाओं के रक्त में इस हार्मोन का स्तर अधिक पाया जाता है तो यह उनके अच्छे ओवेरियन रिजर्व यानी अंडाशय द्वारा पर्याप्त मात्रा में एग्स सेल्स उत्पन्न होने का संकेत माना जाता है। यह हार्मोन छोटे विकसित फॉलिकल्स के जरिए बनता है।
इस प्रकार की समस्या से बचने के लिए डाँक्टर द्वारा मुलेलियन हार्मोन एवं एस्ट्रोडिल की जांच की जाती है। जिनसे गर्भाशय की स्थिति व गर्भस्थ शिशु के विकास की जानकारी मिलती है। इसके आधार पर इलाज तय होता है।
उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के अंडाशय में अंडों की कमी होने लगती है। ऐसा शरीर में पोषण तत्त्वों की कमी से होता है। खराब गुणवत्ता वाला भोजन करने, रक्तसंचार बेहतर न होने, असंतुलित हार्मोन व अन्य सेहत संबंधी समस्याओं के कारण भी महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पातीं है।




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