2.1 किलोमीटर की दूरी तक सबकुछ सामान्य था. डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है.'' ISRO की तरफ से मीडिया सेंटर को भी जानकारी दी गई है। ISRO ने अपने बयान में कहा है कि ''जो प्रेस कॉन्फ्रेस होनी थी वो रद्द कर दी गई है। इसरो चेयरमैन के बयान को दोहराते हुए कहा गया कि 2.1 किलोमीटर पहले लैंडर से संपर्क टूटा. डाटा का अध्ययन अभी जारी है।''
दरअसल रात 1.55 बजे सॉफ्ट लैंडिंग होनी थी, लेकिन करीब 50 मिनट बाद इसरो की तरफ से जानकारी आई कि लैंडिंग 3 मिनट पहले यानि 1.52 पर होगी। मगर 1.52 के बाद लगभग 15 मिनट तक इसरो से से लेंडर का कनेक्शन टूट गया और चिंताएं बढ़ गईं। इसी बीच खबर आई कि लैंडर से इसरो का संपर्क हो गया है, लेकिन 2 बजकर 17 मिनट पर के इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि लैंडर से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हम डेटा आने का इंतेजार कर रहे हैं।
इसके बाद लगभग 2.23 मिनट पर प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों का मनोबल बढ़ाते हुए उनके इस प्रयास की तारीफ की, उन्होंने कहा हिम्मत रखिए, जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। इसके बाद लगभग 2.30 बजे प्रधानमंत्री मोदी इसरो सेंटर से निकल गए।
क्यों टूटा संपर्क, जानें क्या थीं कठिनाइयां:
1- चन्द्रयान-2 जिस दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला है वहां वो बहुत खराब सतह है, जहां गढ्ढे, धूल और बहुत सारे पत्थर हैं।
2- इसके अलावा जब लैंडिग होगी तो प्रोपल्शन सिस्टम ऑन होने के कारण चंद्रमा की सतह से धूल उड़ेगी, जिसकी वजह से लैंडर के सोलर पैनल की पावर सप्लाई पर असर पड़ता है।
3- यही नहीं धूल के कारण ऑनबोर्ड कम्प्यूटर सेंसर्स में भी प्रॉब्लम आ आती है।
4- चांद के जिस हिस्से पर चन्द्रयान-2 लैंडिंग करने वाला था वहां सबसे ज्यादा अंधेरा रहता है।
5- इसके अवाला चन्द्रयान-2 चांद के जिस दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करना था वहां का मौसम भी परेशानियां खड़ा करने वाला होता है।





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