उन्होंने कहा, "तब क्या होगा? वे हम पर हमला करेंगे और हम जवाब देंगे और दोनों तरफ से युद्ध हो सकता है। लेकिन अगर हम अपने खून का अंतिम कतरे तक कोई युद्ध लड़ते हैं तो उस युद्ध में जीतेगा कौन? कोई भी नहीं जीतेगा। इसका पूरी दुनिया के लिए दुखद परिणाम होगा। यह परमाणु ब्लैकमेल नहीं है।"
मंगलवार को नेशनल असेंबली के एक संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए खान ने कहा, "जब हमने सरकार संभाली थी, तब हमारी मुख्य प्राथमिकता हमारे देश में गरीबी को दूर करना था। हम अपने सभी पड़ोसियों के पास गए, क्योंकि सामान्य संबंधों के बिना हम न तो स्थिरता ला सकते हैं और न गरीबी दूर कर सकते हैं।"
खान ने कहा, "उन्होंने कश्मीर में अपनी विचारधारा के अनुसार किया। उनकी विचारधारा नस्लवादी है।"
उन्होंने कहा, "उन्होंने अपनी विचारधारा को बनाए रखने के लिए अपने देश के कानून और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है।"
उन्होंने कहा, "अब वे कश्मीरी लोगों पर और भी सख्ती करेंगे। वे कश्मीरी प्रतिरोध को क्रूरता से दबाने की कोशिश करेंगे। हम चाहते हैं कि वैश्विक नेतृत्व ध्यान दें। मेरी पार्टी और मैं दुनिया के नेताओं से संपर्क करने और कश्मीर में जो हो रहा है, उससे उन्हें अवगत कराने की जिम्मेदारी ले रहा हूं।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू एवं कश्मीर को प्रदत्त विशेष दर्जे को खत्म किए जाने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा के लिए राष्ट्रपति आरिफ अल्वी संसद के दोनों सदनों का एक संयुक्त सत्र बुलाया था।

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