1850 बीसी के मिस्र के कई दस्तावेज बताते हैं महिला योनि में शुक्राणुओं का प्रवेश रोकने के लिए योनि को मगरमच्छ के मल, हनी और सोडियम बाइकारबोनेट के कड़े घोल से भर दिया जाता था। मान्यता था कि इसमें शुक्राणुओं को के अंदर जाने और उसे बढ़ने से रोकने की ताकत है।
मध्यकाल में कुछ ऐस भी मानना था कि अगर महिला की जांघों पर वीजल नाम के जानवर का अंडाशय और एक हड्डी बांध दी जाए तो महिला गर्भवती नहीं होगी। गर्भधारण रोकने के लिए सबसे खतरनाक उपायों में शामिल है लेड और मरकरी से बना घोल जिसे महिलाओं को पिलाया जाता था। इस घोल को सबसे पहले चीन में इस्तेमाल किया गया था।

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