लड़कियों को हर महीने एक दर्द से गुजरना पड़ता है वह है मासिक धर्म। तीन दिन पहले पंजाब के एक बालिका स्कूल के महिला शिक्षकों ने स्कूस की बारह लड़कियों को महज इसलिए कपड़े उतारने मजबूर कर दिया क्योंकि उन्हें स्कूल टॉयलेट में एक इस्तेमाल (यूज) किया हुआ सैनिटरी पैड मिला था। तो उन्होंने छात्राओं के कपड़े उतरवा दिए ताकि यह पता चल सके कि उनमें से किसने सैनिटरी पैड पहना है।
स्कूल में लड़कियां की गयीं फिर नंगी:
यह छात्राएं रोते-बिलखते हुए आरोप लगा रही हैं कि 3 दिन पहले कुंडल गांव में उनके विद्यालय परिसर में शिक्षिकाओं ने उन्हें नंगी किया।लड़कियां छठवीं, सातवीं और आठवीं कक्षा की हैं। लड़कियों ने एसडीएम पूनम सिंह को दिए बयान में कहा कि किसी लड़की ने इस्तेमाल के बाद सैनेटरी पैड टॉयलेट में फेंक दिया था। सातवीं की प्रभारी शिक्षिका ज्योति चुघ इससे नाराज हो गईं। वे जानना चाहती थीं कि पैड किस लड़की ने फेंका। जवाब नहीं मिला तो वे 12 लड़कियों को स्कूल के किचन में ले गईं और उनके कपड़े निकलवाकर चेक किया।
क्या गलत है ये सब:
भारतीय समाज में मासिक धर्म और इस्तेमाल की गई नैपकिन पैड एक टैबू (वर्जित कर्म) बनी हुई है। जहाँ महिला शिक्षक बच्चियों को ये शिक्षित करने के बजाय कि सैनेटरी पैड्स का सही तरीके से कैसे निस्तारण कैसें उन्हें उनकी गलती के लिए बर्बर और अमानवीय तरीके से मानसिक प्रताड़ना देती है। एक लड़की की गलती के बहाने पूरे स्कूल की लड़कियों को नंगी करके उनके आत्मसम्मान पर चोट करती है।

एक टिप्पणी भेजें