सर्वेक्षण के दौरान सभी से कैसे अपनी छुट्टियों से वंचित हैं, और वे किस प्रकार से अपनी छुट्टियां बिताते हैं, क्या वे अपनी छुट्टियों का मजा लेते हैं या काम करना पसंद करते हैं, छुट्टियां बिताने के लिए अपराध-बोध तो महसूस नहीं करते और क्या अपनी छुट्टियों का फैसला करते समय काम के दवाब को ध्यान में रखते हैं, जैसे सवाल पूछे गए। जिसके बाद निकले निष्कर्श में सामने आया कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारतीय ही छुट्टियों की कमी महसूस करते हैं।
इसके बाद दक्षिण कोरिया और हांगकांग के लोग छुट्टियों से वंचित हो जाते हैं। शोध में सामने आया कि लगभग 53 फीसदी भारतीयों को कम छुट्टी मिलती है। वहीं 35 फीसदी लोगों को छुट्टियां मिलती ही नही है। वहीं 68 फीसदी लोग अपनी छुट्टियां रद्द कर देते हैं।
इन सबके बीच जिन लोगों शोध बताता है कि करीब 68 फीसदी भारतीय काम के बोझ के कारण अपनी छुट्टियां रद्द कर देते हैं जबकि 19 फीसदी काम के प्रति प्रतिबद्ध दिखेंगे इसलिए छुट्टियां नहीं लेते। वहीं 25 फीसदी इस डर से कि वो किसी महत्वपूर्ण फैसला लेने की प्रक्रिया में शामिल होने से चूक न जाएंगे इसलिए छुट्टी नहीं लेते जबकि 18 फीसदी लोगों का मानना था कि सफल लोग छुट्टियां नहीं लेते।

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