भगवान परशुराम ने शुरू की थी कांवड़ यात्रा की पंरपरा
पुराणों के अनुसार भगवान परशुराम ने अपने शिव जी की पूजा के लिए भोलेनाथ के मंदिर की स्थापना की जिसके लिए उन्होंने कांवड़ में गंगा जल भरा और जल से शिव जी का अभिषेक किया था। इसी दिन से कांवड़ यात्रा की पंरपरा की शुरुआत हो गई।
अन्य कहानियां भी हैं प्रचलित
परशुराम की कहानी के अलावा एक अन्य कहानी के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ तब उसमें से निकले विष को शिव जी ने पी लिया था। मां पार्वती जी को यह पता था कि यह विष बेहद खतरनाक है इसलिए उन्होंने शिव जी के गले में ही इसे रोक दिया। फिर इस विष को कम करने के लिए गंगा जी को बुलाया गया था तभी से सावन के महीने में शिव जी को गंगा जल चढ़ाने की पंरपरा बन गई।
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