1. पराए घर में न रहें :- स्त्रियों को किसी भी हालत में पराए घर में अकेले रुकना नहीं चाहिए क्यूंकि पराए घर में रहने वाली स्त्री को घर-परिवार और समाज में भी गलत नजर से देखा जाता है। स्त्री की छवि पर भी बुरा असर होता है और साथ ही पराए लोगों पर भरोसा करने से व्यक्तिगत हानि भी हो सकती है।
2. अपनों की उपेक्षा न करें :- घरेलु और सामाजिक मौकों पर कभी-कभी स्त्रियों को अपनों की काफी बातें बुरी लग सकती है। ऐसे में स्त्रियों को चाहिए के अपने मन पर काबू रखकर खुद को शांत करने का प्रयास करना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में घर के लोगों का अपमान न करें और साथ ही इस बात का भी खास ध्यान रखें कि शुभचिंतकों की उपेक्षा करते हुए पराए लोगों के प्रति स्नेह प्रकट न करें।
3. बुरे चरित्र वाले लोगों से रहें दूर :- स्त्रियों को इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वह बुरे चरित्र वाले लोगों का संग न करे। गलत चरित्र के लोगों की संगत से कभी भी संकट की स्थिति पैदा हो सकती है क्यूंकि जिन लोगों की सोच गलत होती है, वे दूसरों को नुकसान पहुंचाने में थोड़ा सा भी विचार नहीं करते हैं।अन्यथा उनमे भी बुरे चरित्र वाले लोगों की बुरी आदतें आ सकती हैं।
4. अधिक समय के विरह से बचना चाहिए :- शास्त्रों के अनुसार किसी भी औरत को अपने पति से ज्यादा समय के लिए दूर नहीं रहना चाहिए। जीवन साथी से दूर रहने वाली स्त्री को समाज में कई प्रकार की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पति के साथ रहने से स्त्री अधिक सशक्त और सुरक्षित रहती है।
5. घर के भेद अपने तक रखें :- नारी एक घर का अभिन्न अंग होती है जिन्हें घर में होने वाली हर छोटी बड़ी बातों का ज्ञान होता है। ऐसे में कई बार कुछ ऐसी बातें भी होती है जो अगर घर तक ही सीमित रहें तभी अच्छा होता है। इसलिए बाहरी लोगों से बात करते हुए सावधानी बरतनी चाहिए और अपने घर के भेद नहीं बताने चाहिए।
6. घरेलु मामलों में संयम बरतें :- स्त्रियों को स्वभाव से बातूनी और भावुक कहा जाता है और कई बार भावावेश में आकर स्त्रियां छोटे घरेलु मामलों को काफी बड़ा बना देती है। ऐसे में कुछ भी बोलने से पहले उसपर विचार जरूर कर लेना चाहिए और अनावश्यक दबाव में नहीं आना चाहिए।




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