रॉयल सोसाइटी ऑफ ओपन साइंस के जर्नल में यह बात कही गई है। स्टडी में कहा गया है कि महिलाएं कुत्ते के भौंकने से इस बात का बेहतर अंदाज लगा सकती है कि अखिर वह क्या चाहता है। रिसर्चर का कहना है कि उन्होने रिसर्च के दौरान 18 कुत्तों के गुर्राने पर रिसर्च किया, जो खाने से लेकर अजनबियों पर भौंक रहे थे जिससे उनके आपसी कम्यूनिकेशन का भी पता चला।
चालीस विभिन्न शोधो के जरिए कुत्तों के गुर्राने का अध्ययन किया गया। जिसमें खुशी, गुस्सा, अवसाद और उत्तेजना के क्षण शामिल हैं। रिसर्च के नतीजे उत्साहजनक रहे। इंसान ने 63 फीसद गुर्राहट की सही पहचान की, जबकि इस मामले मे औसत 33 फीसद है। इस रिसर्च टीम का नेतृत्व करने वाले थामस फरोगे का कहना है कि रिसर्च में पाया गया कि इंसान और कुत्ते दोनों के दिमाग में एक ही जगह पर उच्चारण की क्षमता रहती है।



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