त्याग की भावना
चाणक्य कहते हैं कि त्याग की भावना केवल स्त्रियों में ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है, बल्कि पुरूषों को भी परखने के लिए उनमें त्याग की भावना देखनी चाहिए। जो व्यक्ति दूसरों के सुख के लिए कुछ भी नहीं करता वो कभी भी भला इंसान नहीं हो सकता है।
चरित्रवान होना जरूरी
अक्सर जब भी चरित्र की बात होती है, तो समाज केवल स्त्रियों के चरित्र के बारे में बात करना पसंद करता है। जबकि किसी भी व्यक्ति, फिर चाहे वो स्त्री हो या पुरूष उसके चरित्र को परखना बेहद जरूरी है। कोई भी ऐसा व्यक्ति जो अपने मित्रों, पति, पत्नी, करीबियों को धोखा देता है वो व्यक्ति कभी भी अच्छा नहीं हो सकता है।
मानवीय गुण देखने चाहिए
अगर वाकई में किसी को परखना हो तो उस व्यक्ति के गुण देखने चाहिए। वैसे तो हर व्यक्ति में गुण-अवगुण दोनों होते हैं, लेकिन अगर आपने अवगुणों की तुलना में गुण ज्यादा हैं तो आप बेहतर इंसान की इसी गुण से पहचान कर सकते हैं। जो स्त्री और पुरूष क्रोध करना, बात-बात पर झूठ बोलना, दूसरों का अपमान करना और अहंकार के कारण वो कभी भी किसी का भला नहीं कर पाते।
जन्म नहीं कर्म को परखिए
कोई व्यक्ति किस स्थिति अथवा किस कुल में जन्मा है, इन बातों को परखने की बजाय उसके कर्म को परखना चाहिए। कर्म पर आधारित बातें स्त्री और पुरूष दोनों पर समान रूप से लागू होता है।

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