धनतेरस पर ब्रह्म मुहूर्त में इस मंदिर के कपाट खुलते हैं और पांच दिन के लिए यहां दीपावली पर्व मनाया जाता है। इस मंदिर में वर्षों से मां को गहने और रुपये अर्पित करने की परंपरा है। इस मंदिर की सजावट फूलों, झालरों से नहीं बल्कि रुपयों और जेवरात से की जाती है। जानिए इस मंदिर की खास बातें। इन 5 दिनों में इस मंदिर की सजावट देखने की बनती है, क्योंकि इस मंदिर को फूल या और किसी सजावटी चीज नहीं बल्कि सोने, चांदी और नोटों से सजाया जाता है।
मंदिर में अर्पित चढ़ावे का हिसाब रखा जाता है ताकि भक्तों को उनका पैसा मिल सके। लक्ष्मी मंदिर के अलावा श्रीगणेश चतुर्थी के दौरान सिद्धि विनायक मंदिर में भी भक्तों को चांदी के सिक्के दिए जाते हैं। धनतेरस पर महिला श्रद्धालुओं को यहां कुबेर की पोटली दी जाती है। धनतेरस से दीपावली तक यह मंदिर सोने, चांदी और नोटों से सजा नजर आता है। मान्यता है कि यहां आने वाला भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता है। जिसके लिए बगहुत ही दूर-दूर से लोग यहां पर आते है।

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