ऐसा कहा जाता है कि बहुत समय पहले भगवान शिव और पार्वती माता ने इस दिन जुआ खेला था। इसी के चलते यह प्रथा इस त्यौहार के साथ जुड़ गई हालाकिं पुराने ग्रंथों में इसका कोई जिक्र नहीं है लेकिन फिर भी लोग इस दिन जुआ खेल कर अपने घर की लक्ष्मी को नराज करते है।
कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन जुआ खेलने से लक्ष्मी मां प्रसन्न होती है लेकिन यह बात पूरी तरह गलत है। इस दिन जुआ खेलने से घर की लक्ष्मी के साथ-साथ सुख शांति भी चली जाती है।
देश के कुछ गांव में लोग आज भी इसे एक प्रथा मान कर दिवाली वाले दिन जुआ खेलते है। ऐसा करने की बजाए आप उन पैसों से किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकते है। पर परंपराओं के बारे में किसी से बहस करना तो वैसे भी बेकार होता है।

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