Birthday Special: अमिताभ बच्चन के 10 फेमस डायलॉग्स जो हिट थे और हमेशा हिट रहेंगे


फिल्म इंडस्ट्री में अमिताभ बच्चन के कई ऐसे संवाद हैं जो सिनेमा दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ गए हैं। आज भी ये डॉयलॉग लोकप्रियता में आज की फिल्मों पर भारी पड़ते हैं। आइए हम आपको अमिताभ के कुछ ऐसे ही डॉयलॉग जो बॉलीवुड की फिज़ाओं में आज भी गूंज रहे हैं।

फिल्म शहंशाहडॉयलॉग :- 'रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं, नाम है शहंशाह'।

फिल्म शराबीडॉयलॉग :-  गोवर्धन सेठ, 'समुंदर में तैरने वाले, किसी और तालाब में डुबकी नहीं लगाया करते हैं'।
डॉयलॉगः 'जिगर का दर्द ऊपर से कहीं मालूम होता है। जिगर का दर्द ऊपरसे नहीं मालूम होता है'।
डॉयलॉगः 'मूछें हों तो नत्थूलाल जैसी हों, वरना ना हों'।

फिल्म अमर अकबर एंथोनी डॉयलॉग :-  'ऐसा तो आदमी दोइच्च टाइम भागता है। ओलंपिक की रेस हो या पुलिस का केस. तुम किसलिए भागता है भाई'।

फिल्म जंजीर डॉयलॉग :- 'जब तक बैठने को ना कहा जाए शराफत से खड़े रहो। ये पुलिस स्टेशन है तुम्हारे बाप का घर नहीं'।

फिल्म दीवार डॉयलॉग :-  'आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है तुम्हारे पास क्‍या है?' फिल्म के अगले सीन में शशि कपूर कहते हैं, 'मेरे पास मां है'।
डॉयलॉगः 'सपने भी समुदर की लहरों की तरह, हकीकत की चट्टानों से टकरा कर टूट जाते हैं'।

फिल्म काला पत्थर डॉयलॉग :- 'ये कोयले की खान एक अजगर है सेठ साहब, जो रोज, अनगिनत लोगों को निगलकर, उसे पीसकर, जिस्म से खून का एक-एक कतरा चूस कर एक लाश के रूप में उगल देता है'।

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