वो 7 बातें जिन्हें सुन-सुन कर पक चुकी है बड़े शहरों की हर लड़की


कुछ बातें हर लड़की को अपनी लाइफ में झेलनी पड़ती हैं। भले ही वह इन बातों से कितना ही भाग ले और कितनी ही बार इनके जवाब दे दे, लेकिन फिर भी गाहे बगाहे ये बातें सवालों की शक्ल में उसके सामने परोस दी जाती हैं अक्सर लड़की होना हर लड़की को कई सवालों का जवाब देने पर मजबूर कर देता है। खासकर जब लड़की बड़े शहरों की हो... वह कितनी ही तरक्की क्यों न कर ले कुछ  सवाल उसका पीछा नहीं छोड़ते। कभी ये फैमिली में उठते हैं, तो कभी रिश्तेदारी में, कभी पड़ोस में तो कभी उसके खुद के कुछ दोस्त भी ऐसे सवाल कर बैठते हैं...

इतनी रात को बाहर
अगर वह रात को अपने दोस्तों के साथ कहीं बाहर पार्टी करने जाना चाहती है, तो यह सवाल उसके कानों तक जरूर पहुंचेगा। ' क्या इतनी रात को बाहर जाने की जरूरत है।' दिन में भी तो पार्टी की जा सकती है न।

अकेले घूमने जाओगी
भले ही आप अपनी और पांच दोस्तों के साथ कहीं ट्रि‍प का प्लान बना कर बैठी हों, लेकिन पड़ोस की वो आंटी ये जरूर बोलेंगी - '' क्या अकेले घूमने जाओगी।'' उन्हें यह समझाने की कि छह लोग अकेले कैसे हुए

ढंग से बैठो
'ये क्या है, पैर खोल कर क्यों बैठी हो, ढंग से बैठो...' यह बात कभी किसी लड़की ने न सुनी हो यह मुझे तो असंभव सा लगता है। एक बात आज तक समझ नहीं आई कि बैठने का सही ढंग क्या होता है।

ये क्या पहना है
जाने कौन-कौन आकर 'माई च्वॉइज' का भाषण तक दे चुका है, जाने कितने लोग पहनावे को लेकर सफाई देते हैं। लेकिन फिर भी यह सवाल वहीं का वहीं है- ' ये क्या पहना है'।

शादी कब कर रही हो
इस सवाल से तो हर लड़की को नफरत है। अरे भई मेरी शादी से किसी को क्या लेना देना। खासकर उन अंकल या आंटी की लाइफ को जो हमारे घर ही सालों में एक बार आते हैं ।

धीरे बोला करो
क्या भई, आखि‍र तेज बोलने में क्या बुराई है। चलो ठीक है, लोग कहते हैं कि धीमा बोलना ठीक है, तो यह सलाह सिर्फ लड़कियों को ही क्यों दी जाती है।

क्या तुम ड्राइव कर लेती हो... 
जाने लोग कब समझेंगे कि ड्राइविंग के लिए हाथ, पैर और आखों की जरूरत होती है। इसका इस बात से कोई मतलब नहीं कि शरीर लड़के का है या लड़की का। फिर भी किसी लड़की को ड्राइव करते हुए देख यही क्यों पूछा जाता है कि ' तुम ठीक से ड्राइव कर तो लेती हो न'।

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