किसी ने सही कहा है की छोटा बच्चा समझ कर हमसे न टकराना रे। बच्चो की उम्र खेलने कूदने की होती है।लेकिन नही उसी उम्र में इंग्लैंड की लीसेस्टर यूनिवर्सिटी में 14 साल का मुस्लिम लड़का गणित का प्रोफेसर बन गया है। जी हा यह सही है यूनिवर्सिटी ने अतिथि शिक्षक के रूप इस बच्चे को चुन लिया है।
इस यूनिवर्सिटी में सबसे कम उम्र के विध्यार्थी और सबसे कम उम्र के प्रोफेसर के उपनाम से सम्बोधित किया जाता है।गणित में उसके अच्छे खासे ज्ञान को देखकर उसके घरवाले उसे मानव कैल्कुलेटर कहते हैं। याशा के पिता मूसा एस्ले प्रतिदिन उसे खुद यूनिवर्सिटी तक छोडऩे जाते हैंउसे यूनिवर्सिटी में सबसे कम उम्र के छात्र और सबसे कम उम्र के प्रोफेसर के उपनाम से सम्बोधित किया जाता है। पढ़ाई पूरी होने पर वे आगे पीएचडी की तैयारी में हैं। और बेटे की इस उपलब्धि पर फक्र करते है।




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