सीताफल का आयुर्वेद में बहुत ज्यादा वर्णन है इसका नाम सीताफल तब से पड़ गया जब सीता माता ने वनवास में श्रीराम को यह फल भेट किया था। सीताफल के अंदर बहुत सारी खूबियां पाई जाती हैं आयुर्वेद के अनुसार इसका मतलब होता है शीत फल जिसका मतलब होता है शरीर को शीतलता देना। इसके अंदर हमारे बहुत से रोग जैसे की तृषा सामक,उल्टी रोकना, कृति करता, वीर्यवर्धक रक्तवर्धक इन सब को रोकने के गुण पाए जाते हैं।
तथा इसके खाने से हमारे सर की छड़े हुए बाल भी वापस आ जाते हैं सीताफल के अगर पत्तों को हम लोग पीसकर अपने चोट पर लगाए तो वह हमारी चोट सही हो जाती है। अगर सीताफल के बीज को अगर हम बकरी के दूध के साथ लेंगे तो हमारे झड़े हुए जितने भी सर के बाल होते हैं वह वापस उग आते हैं। सीताफल के अंदर घबराहट, तथा तेज हार्ट बीट को दूर करता है इससे हमारे अंदर होने वाले हाई ब्लड प्रेशर को भी यह दूर करता है।
कच्चा सीताफल खाने से हमारे अंदर जितनी भी पेचिस होते हैं वह दूर हो जाते हैं। सीताफल हमारे लिए बहुत बड़ी दवा का काम करता है इसको खाने से हमारी दुर्बलता भी हमसे दूर हो जाती है।




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