कांडापारा की तंग गलियों में हजारों औरतें प्रॉस्टिट्यूशन के दलदल में बुरी तरह धंसी हैं। यहां यहां कई लड़कियां ऐसी हैं, जो यहीं पर पैदा हुईं और इसके बाद वे भी इस धंधे में आ गईं। इन बच्चियों को यह भी नहीं पता होता कि उनका पिता कौन है। इसके चलते इनकी दुनिया सिर्फ यहीं तक सीमित है। इसके अलावा ज्यादातर लड़कियां ट्रैफिकिंग की शिकार हैं, जिन्हें बांग्लादेश के दूसरे एरिए से लाकर यहां बेच दिया जाता है।
यहां इतनी जबर्दस्त सिक्युरिटी होती है कि कोई भी लड़की भाग नहीं सकती। सिर्फ कस्टूमर के साथ ही बाहर जाया जा सकता है। इतना ही नहीं, बड़ी दिखने के लिए यहां 10 से 13 साल की बच्चियों को ओराडेक्शन नाम की खतरनाक दवाई दी जा ती है, जो हेल्थ के लिए खतरनाक है। लड़िकयों के लिए रोजाना या मंथली के हिसाब से पैसा कमाने का टार्गेट दिया जाता है, जबकि इसके बदले में उन्हें 400 से 500 रुपए ही मिलते हैं।



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