वैज्ञानिक दृष्टि
वैज्ञानिक दृष्टि पर नजर दौड़ाएं तो विभिन्न धातुओं के मिश्रण से पानी की शुद्धता बरकार रहती है। मानव जीवन के लिए जड़ी-बुटी या धातुओं की आवश्यकता बहुत जरूरी है, इस रूढि़वादी परम्परा से जलाशयों के पानी में लौह, तांबा व पीतल के तत्व समाहित होते रहे हैं। आज भी कई दुर्लभ धातुओं के भस्मों से गम्भीर बीमारी का उपचार किया जाता है।
बुजुर्गों का मानना
कुछ बुजुर्गों का मानना है की नदी पर भूत-प्रेत का साया मंडराता है उस साय को प्रसन्न करने के लिए नदी में सिक्के डाले जाते हैं। अब पीतल, तांबा या चांदी के सिक्कों का चलन बंद होने से लोग स्टील के सिक्के नदी को भेंट करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र
ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब के अनुसार तांबे का सिक्का पानी में डालने से सूर्य देव अनुकुल होते हैं और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। बदलते दौर में तांबे के सिक्कों का प्रचलन समाप्त होने से स्टेनलेस स्टील के सिक्कों को उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब लोग पानी में फेंकते हैं।
आम धारणा
कुछ लोगों की मान्यता है कि नदी में सिक्के अर्पित करने से उनके जीवन में आ रही बाधा और परेशानियों से नकारत्मकता का अंत होगा और सकारात्मकता का संचार होगा। धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बनाएं रखेंगी।
إرسال تعليق