आज जान ले आखिर किस पर लागू होते हैं वास्तुशास्त्र के नियम


वास्तुशास्त्र का अधिकतम उपयोग उद्योगपति, फैक्टरी, दुकानदार अथवा उच्चा भवनों व महलों वाले ही करते हैं। गरीब लोगों के लिए इसका प्रयाग कम होता है। वास्तुविज्ञान पर यह आरोप निराधार है। जैसे सूर्य की किरणें अमीर-गरीब के भेद किए बिना सभी को समान रूप से रोशनी देती है। हवा की किरणें अमीर-गरीब के भेद किए बिना सभी को प्रभावित कर देती है।  

ठीक उसकी प्रकार से पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि एवं वायु इन पांच तत्वों के संतुलन पर आधारित वास्तुशास्त्र का ज्ञान अमीर-गरीब सभी को समान रूप से बिना भेदभाव के प्रभावित करता है। यह व्यक्ति के स्वयं की योग्यता है कि ज्ञान के इस अनमोल खजाने से वह कितना ग्रहण कर पाता है। झोंपडी निर्माण में वास्तु विज्ञान की उपयोगिता के संदर्भ में एक बहुत ही रोचक किन्तु सर्वाधिक प्रमाणित दृष्टान्त प्रमुख पाठकों के सामने प्रस्तुत है। भगवान श्रीराम ने वनवास काल में पंचवटी में घास फूंस से अपनी झोंपडी बनाई।

वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार वायु-प्रकाश की समुचित व्यवस्था को देखकर भगवान श्रीराम प्रसन्न हो उठे और लक्ष्मण से कहा-हे लक्ष्मण! हम इस पर्णशाला के अधिष्ठाता वास्तु देवता का पूजन यजन करेंगे। क्योंकि दीर्घ जीवन की इच्छा करने वाले पुरूषों को वास्तुशांति अवश्य करनी चाहिए। वास्तु शास्त्र की महत्ता प्रमाणिकता एवं उपयोगिता का इससे उत्कृष्ट उदाहरण और क्या हो सकता है।

Post a Comment

और नया पुराने