सूर्य की विभिन्न स्थितियों को कुछ कार्यों के लिए उत्तम तथा कुछ के लिए खराब माना जाता है। निम्न प्रकार के कार्यों को दिन के निश्चित वक्त में ही उत्तम माना जाता है....
- बहुत सवेरे 3 से साढ़े 4 बजे के बीच के समय को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। इसे प्रार्थना के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
- प्रात: साढ़े 4 से 6 बजे के बीच के वक्त को ऊषा काल कहते हैं। यही वक्त है जब सम्पूर्ण ब्रह्मांड में नवीन ऊर्जा तथा ओजस भर जाता है। यह वक्त दैनिक कार्यकलाप शुरू करने के लिए उत्तम है।
- प्रात: 6 से 9 बजे के वक्त को अरुण कहते हैं जब सूर्य की किरणें फैल चुकी होती हैं। यह वक्त दैनिक कार्यकलाप शुरू करने के लिए अच्छा है।
- प्रात: 9 बजे से 12 बजे के दौरान सूर्य का अपना राज होता है। इसे प्रथहाकाल कहते हैं।यह वक्त कोई भी पेशेवर कार्य करने के लिए उत्तम है।
- 12 से 3 बजे के वक्त को मध्याह्न काल कहते हैं। इस वक्त सूर्य की किरणें मददगार मानी जाती हैं। मध्याह्न काल का वक्त मजबूत निर्णय लेने के लिए उत्तम है।
- 4 से 6 बजे के वक्त को अपराह्न कहते हैं। माना जाता है कि इस दौरान सूर्य की किरणों में विध्वंसक शक्ति होती है। यह समय व्यायाम करने के लिए अच्छा माना गया है।
- 6 से साढ़े 7 बजे को सायंकाल कहते हैं जो कार्य से घर लौटने का समय होता है।
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