यह स्टडी महिलाओं के ब्रेन स्कैन्स पर आधारित हैं। इसमें पाया गया कि जो महिलाएं गर्भवती रहीं उनके दिमाग में कई जगह ग्रे मैटर की मात्रा कम हुई है। यह बदलाव कम से कम दो साल तक रहता है। लैडन यूनिवर्सिटी की इस रिसर्च में बताया गया है कि ये बदलाव एक मां को उसने नवजात बच्चे की जरूरतों को समझने में मदद करते हैं और मां-बच्चे के बीच करीबी बढ़ाते हैं।
रिसर्चर्स के मुताबिक यह बदलाव लगभग हर महिला में पाया गया। यहां तक की कंप्यूटर भी खुद ही उन महिलाओं को पहचान पा रहा था जो प्रेग्नेंट थीं। रिसर्चर्स ने बताया कि कि उन्होंने MRI की मदद से 25 महिलाओं के मां बनने से पहले और उसके बाद के दिमागी संरचना की तुलना की। ये सभी महिलाएं पहली बार मां बन रही थीं। इस स्कैनिंग की उन महिलाओं से भी तुलना की गई जो मां नहीं बनीं।
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