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तनाव बढ़ने की उम्मीद होती है तो धारा 144 को ऐहतियातन उस इलाके में लागू किया जाता है। यह मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक निषेधाज्ञा होती है, जिसमें आम जनता पर कुछ प्रतिबंध लगाए जाते हैं। आमतौर पर इसे दंगा, लूटपाट, आगजनी, हिंसा, मारपीट को रोकने तथा फिर से शांति की स्थापना के लिए किया जाता है। धारा 144 समय समय पर एहतियात के तौर भी लगाई जाती है जिसमें लोगों को इन बातों का ध्यान रखना होता है….
1. अस्त्र-शस्त्र व विस्फोटक पदार्थ को लेकर आने जाने पर सामान्यतया प्रतिबंध होता है। केवल धार्मिक आधार पर व सुरक्षा में जुड़े लोगों को इससे अलग रखा जाता है।
2. पांच व उससे अधिक व्यक्ति को एक साथ एकत्रित होने, एक साथ मिलकर सभा करने या फिर उसके लिए प्रेरित करने पर प्रतिबंध होता है। पर मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, शवयात्रा, विवाह व बरात इत्यादि जैसे आयोजनों को इससे मुक्त रखा जाता है।
3. किसी व्यक्ति या समूह के बैनर, पोस्टर, पर्ची के जरिए ऐसे किसी प्रचार प्रचार को प्रतिबंधित किया जाता है, जो आम लोगों में डर, भय, असुरक्षा या क्षेत्र में अशांति पैदा करता हो।
4. जन समस्याओं की आड़ में धरने, प्रदर्शन, रेल रोको, चक्का जाम जैसे आयोजनों पर प्रतिबंध होता है।
5. प्रशासन ऐसे समूह व व्यक्ति को जिला या क्षेत्र विशेष से कुछ समय के लिए बाहर भी भेज सकता है, अगर उससे शांति व्यवस्था प्रभावित होती है।
6. धारा 144 का उल्लंघन करने वालों पर आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई होती है, जिसमें एक महीने के कारावास या 200 रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
7. इस दौरान संदिग्ध लोगों को 107(16) में पाबंद किया जा सकता है।
8. अशांति फैलाने वालों की 151 के तहत गिरफ्तारी की जा सकती है।
9. वैसे तो यह जमानती अपराध है और मजिस्ट्रेट के पासे से ही जमानत हो जाया करती है। पर अगर जमानत न कराई जाय तो संबंधित व्यक्ति जेल जाना पड़ता है।
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