हमारी हिन्दू संस्कृति कई मायनों में सभी से अलग है। पर कुछ अनुकरणीय बातें इसमें ऐसी भी हैं कि जो सभी धर्मों में समान रूप से मानी जाती हैं। ऐसी ही एक आदत है- सुबह सोकर उठते ही धरती को प्रणाम करना। क्यों किया जाता है ऐसा, वो भी धरती के लिए?दरअसल सभी धर्मों में धरती को मां समान पूजा जाता है।
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इसके पीछे यह धारणा होती है कि जो धरती अन्न पैदा कर पूरे जीवन भर हमारा लालन-पोषण करती है, उसके प्रति हमारे दिल में श्रद्धा-भाव हमेशा बना रहे। धरती को भगवान का रूप माना जाता है। इसलिए भी वह हमारे लिए पूजनीय है। रात भर सोने से मनुष्य के शरीर में नकारात्मक शक्तियां हावी हो जाती हैं। जब सुबह हम धरती को प्रणाम करने के लिए झुकते हैं तो सारी नकारात्मक ऊर्जा धरती में समा जाती है।
वहीं शरीर में सकारात्मकता का संचार होता है। यह सकारात्मक ऊर्जा दिनभर शरीर को आलस्य से दूर रखती है और मन-मस्तिष्क को कर्म करने की प्रेरणा देती है। सुबह-सुबह उठते ही धरती को प्रणाम करना हमारी सांस्कृतिक विरासत की अग्रणी परंपरा है। इन्हीं सब कारणों से सुबह उठते ही धरती को प्रणाम किया जाता है।
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