अपना रूटीन काम निपटाने के बाद वह रात को खाना खाने गया और सो गया। लगभग 2 बजे वह उठा और उसे काफी दर्द हुआ और लगातार उल्टियां होने लगी। उसका परिवार उसे अस्पताल ले गया। अस्पताल ले जाते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अचानक मौत के कारण सदमे में आए परिवार ने बीड़ी गांव के एक सपेरे से संपर्क किया जिसने आश्वासन दिलाया कि वह उसे जिंदा कर देगा। सपेरे ने कुछ घंटों के लिए उसके शरीर को नाम से कवर करने की सलाह दी और कहा कि वह जिंदा हो जाएगा।
उसने परिवार को विश्वास दिलाया कि नमक से ढंकने के बाद जहर बाहर आ जाएगा। पूरा गांव लगभग एक घंटे से ज्यादा समय तक इस चमत्कार का इंतजार करता रहा। लेकिन यह नाटक तब खत्म हुआ जब पुलिस कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और परिवार को पोस्टमार्टम के लिए शव देने को कहा। जब जिंदा होने की उम्मीद नहीं रहती तो परिवार ने शव पोस्टमार्टम के लिए दे दिया। उसके बाद दोपहर में अंतिम संस्कार किया गया।
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