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ऐसे में यहां आने वाले लोग दरगाह में मौजूद 90 किलो वाले पत्थर को जरूर उठाते हैं। वह भी अपनी उंगली से। यह पत्थर दरगाह परिसर में ही रखा है। इस पत्थर को 11 लोग सूफी संत का नाम लेते हुए तर्जनी उंगली से उठाते हैं। इस दौरान अगर किसी एक ने भी ठीक से नाम नहीं लिया तो पत्थर उसकी ओर झुक जाता है। इसके अलावा अगर एक भी लोग कम होते हैं तो ये पत्थर नहीं उठता है।
इस चमत्कार को करने व देखने के लिए लोगों की काफी भीड़ होती हैं। वहां आने वाले लोग इसे आस्था का प्रतीक मानते हैं। बतादें कि हजरत कमर अली एक सूफी थे। यह मात्र 18 साल ही जीवित रहे थे। आज से करीब 700 वर्ष पूर्व उनको मृत्यु के बाद यहीं पर दफनाया गया था। इतना ही नहीं उन्हें संत की उपाधि से सम्मानित भी किया गया था। आज यहां पर साल भर बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ रहती है। सबसे खास बात तो यह है कि यहां पर हर धर्म के लोग आते हैं।
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