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इसके साथ ही शादी को लेकर यहां का एक और नियम ऐसा है जो काफी बेहतरीन है। वह यह कि अगर वर और वधु दोनों एक ही गांव के हों तो ये दोनों के वैवाहिक जीवन के लिए काफी शुभ माना जाता है। इस बारे में गांव के मौलवी अरशद कहते हैं कि अगर किन्हीं कारणों से लड़की की बारात किसी दूसरे गांव से भी आ जाती है तो इसे काफी अशुभ माना जाता है। उनका कहना है कि इस प्रथा का एक और कारण यह भी है कि ऐसा मानने से किसी अंजान गांव से आने वाले वर के अनभिज्ञ इरादों और स्वभाव के चपेट में आने से लड़कियां बच जाती हैं। मौलवी कहते हैं कि यही कारण है कि वे सब अपने पूर्वजों के बनाए हुए नियमों का इमानदारी के साथ पालन करते हैं।
इसके अलावा कुछ और भी अच्छी बातें हैं यहां के पूर्वजों के बनाए रिवाजों में। इनमें से अगली है कि शादी के दौरान लोग गलियों या सड़कों पर नाच-गा नहीं सकते। कुल मिलाकर वैवाहिक समारोह को भी काफी सम्मान के साथ मनाए जाने का रिवाज है। किसी भी तरह का शोर-शराबा नहीं चाहिए इस दौरान।
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