अपने लघु जवाब में सेना ने कहा कि शादीशुदा महिलाएं ‘‘मातृत्व अवकाश ले सकती हैं जिससे आफीसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में उनका प्रशिक्षण रूक जाएगा।’’ सेना ने कहा कि दस महीने के प्रशिक्षण काल के बाद महिला अभ्यर्थी शादी कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि संभावना रहती है कि विवाहित महिला अभ्यर्थी लिंग की विशिष्टता के कारण सश्रम प्रशिक्षण पूरा नहीं कर पाएं जो उन्हें उनके प्रशिक्षण के दौरान दिया जा सकता है।
सेना ने कहा कि इसलिए शुरुआती चरण में महिला अभ्यर्थियों के विवाह पर पाबंदी यह सुनिश्चित करने के लिए है कि वे हमेशा उस शारीरिक स्थिति में हों जिससे वे पद संभालने से पहले के प्रशिक्षण में भाग ले सकें। इसके अलावा यह पाबंदी पुरुष अभ्यर्थी पर भी लागू है कि अगर वे अविवाहित हैं तो उनके प्रशिक्षण के दौरान विवाह पर पाबंदी है।
सेना उस याचिका पर जवाब दे रही थी जिसमें केन्द्र को पुरुषों की तरह जैग विभाग में विवाहित महिला विधि स्नातकों को भर्ती करने के निर्देश का अनुरोध किया गया था।
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