कल्पना कीजिये ऐसे देश की जिसमे महिलाओ को वो सारे काम करने की इजाजत हो जिसको किसी समाज में मान्यता नही मिलती या यूँ कहे की वो हर काम जिसकी इजाजत कोई भी समाज नही देता। हिंदुस्तान में तो पति को भगवान् का दर्जा दिया गया है, लेकिन अगर यही दर्जा महिलाओ को दे दिया जाए तो. क्या दुनिया में कही ऐसा कोई देश है जहाँ पत्नियों को भगवान् का दर्जा मिला हो?
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जी हाँ, इस दुनिया में एक ऐसी जनजाति भी रहती है जिसमे पत्नियों को भगवान का दर्जा दिया गया है। अफ्रीका के नाइडर के पास तुआरेग नाम की जनजाति रहती है। इस जनजाति में महिलाओ को वो सब अधिकार मौजूद है जो आजकल के समाज में मर्दों के पास है. यहाँ की महिलाये पर्दे में नही रहती बल्कि मर्दों को पर्दे में रहना पड़ता है।
इस जनजाति में महिलाओ को एक ऐसा अधिकार भी प्राप्त है जिसकी आप कल्पना भी नही कर सकते. यहाँ की महिलाओ को शादी के बाद किसी गैर मर्द के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने की छूट है। यही नही अगर शादी से पहले कोई लड़की किसी मर्द के साथ सेक्स करती है तो भी उसे गलत नही समझा जाता।
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इन सबके अलावा इस जनजाति में महिलाओ को घर की मुखिया होने का सम्मान प्राप्त है. घर के हर फैसले लेने का अधिकार केवल महिलाओ को होता है। अगर मर्द कोई काम करना चाहते है तो उनको पहले अपने घर की महिलाओ से इसकी इजाजत लेनी पड़ती है. यहाँ महिलाओ को यह अधिकार भी प्राप्त है की वो किसी भी वक्त अपने पति से अलग हो सकती है या उससे तलाक मांग सकती है।
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