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वेद-पुराण और विद्वानों के अनुसार भोजन के समय ध्यान रखना चाहिए कि हम किसी अन्य व्यक्ति को अपना जूठा खाना न दें। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी है तो उसका जूठा भोजन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही ध्यान रखें कि यदि कोई व्यक्ति भोजन कर रहा हो तो हमें उसके साथ बीच में खाना नहीं खाना चाहिए। ये बात शिष्टाचार से नियमों के विरुद्ध है।
भोजन इतना ही खाना चाहिए जितना हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक रहे। न तो ज्यादा भोजन करें और ना ही कम। जरूरत से कम या अधिक भोजन करने पर पेट संबंधी बीमारियां होने की संभावनाएं रहती हैं। अधिक भोजन से आलस्य बढ़ता है। कम भोजन से हमारे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त नहीं हो पाती है। खाना वहीं खाएं जो आपके स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाता है।
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इस संबंध में सबसे जरूरी बात यह है कि भोजन करने के तुरंत बाद व्यक्ति को बिना मुंह और हाथ साफ किए कहीं इधर-उधर जाना नहीं चाहिए। जूठे मुंह और हाथों से घर में घुमना अशुभ माना जाता है। घर में खाने के बाद ऐसा करते हैं तो इससे हमारे हाथों में लगी जूठन कहीं गिर सकती है, जो कि घर को अपवित्र बनाती है। इस प्रकार की अपवित्रता का अशुभ प्रभाव घर में रहने वाले सभी सदस्यों पर पड़ता है। इसीलिए ध्यान रखें कि भोजन के तुरंत बाद सबसे पहले शुद्ध पानी से हाथ और मुंह अच्छे साफ कर लेना चाहिए।
आजकल बाजार में कुछ न कुछ खाने-पीने का चलन काफी बढ़ गया है, ऐसे में कुछ लोग ऐसी खाने के बाद हाथ-मुंह साफ नहीं करते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह अनुचित है। कुछ भी खाने के बाद हमें हाथ-मुंह अच्छे पानी से अवश्य साफ करना चाहिए। जूठे मुंह-हाथ लिए इधर-उधर घुमना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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