इस मुस्लिम दरगाह में हिन्दू- मुस्लिम धूमधाम से मनाते है जन्माष्टमी


मुस्लिम समुदाय के लोग दरगाह में जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाते हैं। भारत विविधताओं का देश है और त्योहारों से इसकी सांस्कृतिक विरासत का अहसास होता है।आज भी कुछ लोग धर्म और कट्टरवाद से ऊपर उठकर खुशी को अहमियत देते हैं हुए हिन्दू- मुस्लिम की एकता की मिसाल बने हुए हैं।  

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एक जगह ऐसा भी है, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग दरगाह में जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन बेहद कम लोगों को ही इसकी जानकारी होगी। राजस्थान में झुंझुनू जिले के चिरवा स्थित नरहर दरगाह, जिसे शरीफ हजरत हाजिब शकरबार दरगाह के रूप में भी जाना जाता है, में भगवान कृष्ण के जन्मदिन यानी जन्माष्टमी के अवसर पर तीन दिनों का उत्सव आयोजित किया जाता है।

त्योहार के दौरान दरगाह के आसपास 400 से ज्यादा दुकानें सज जाती हैं। जन्माष्टमी की रात यहां मंदिरों की तरह ही कव्वाली, नृत्य और नाटकों का आयोजन होता है।दरगाह के सचिव उस्मान अली कहते हैं, ‘यह कहना बेहद मुश्किल है कि यह त्योहार कब और कैसे शुरू हुआ, लेकिन इतना जरूर है कि यह राष्ट्रीय एकता की सच्ची तस्वीर पेश करता है। क्योंकि त्योहार को यहां हिंदू, मुस्लिम और सिख साथ मिलकर मनाते हैं।’ उन्होंने कहा कि नवविवाहित जोड़े यहां खुशहाल और लंबे वैवाहिक जीवन की मन्नतें मांगने आते हैं।पास के गांव की रेखा ने कहा कि वह यहां पिछले दो साल से आ रही हैं। यहां आकर उन्हें मानसिक शांति मिलती है। साथ ही वह मेले का भी लुत्फ उठाती हैं।

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पठान ने आगे कहा, ‘यह पर्व पिछले 300-400 वर्षों से मनाया जा रहा है। यहां हर समुदाय के लोग आते हैं। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य हिंदुओं और मुस्लिमों में भाईचारे को बढ़ावा देना है।’

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