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आयुर्वेद और विज्ञान की मानें तो राइट हैंडेड यानी दाए हाथ से काम करने के अभ्यस्त होने के चलते बेहतर है कि हम दाईं दिशा को महत्व दें। जरूरी यह है कि सोकर दाईं दिशा से उठें।
विज्ञान और आयुर्वेद के मुताबिक सोकर दाई दिशा से उठने पर हम कई शारीरिक समस्याओं से लड़ने की ताकत हासिल करते हैं। यही नहीं हमारा तन और मन शांत होता। तनाव हमसे दूर हो जाता है। असल में हमारे मस्तिष्क की दाईं दिशा बाईं दिशा की तुलना में ज्यादा सक्रिय होती है। यही कारण है कि हमें अपने सोकर दाईं दिशा से ही उठना चाहिए।
सेक्स के बाद दाया साइड ज्यादा सक्रिय होता है। यदि हम इस दिशा की अनदेखी करते हुए बाई दिशा से उठते हैं कि दाएं हाथ या दाएं अंग पर ज्यादा दबाव बन सकता। कोई नस खिच सकती है। यहां तक कि मसल्स में खिचाव भी बन सकता है।
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यदि कोई व्यक्ति किसी मर्ज के कारण बार बार इंजेक्शन लगवाता हो तो उसके लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वह दाई दिशा से उठे। क्योंकि यदि वह बाई दिशा से उठेगा तो इंजेक्शन लगे हाथ में उसे दर्द हो सकता है। हालांकि इंजेक्शन लगना हमारे नसों की स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन यह भी सच है कि ज्यादातर समय बाएं हाथ में इंजेक्शन लगावा जाता है। अतः दाईं दिशा का चयन करना समझदारी है।

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