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यह महिला खुर्जा के बगराई गांव की रहनेवाली है। लंबे समय से बुखार से पीड़ित कैला देवी ने 25 जुलाई की सुबह दम तोड़ दिया। घर में बुजुर्ग की मौत पर नाते-रिश्तेदार जुटे। गांव का हुजूम इकठ्ठा हो गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां हो गयी, लेकिन अचानक कैला देवी की सांसें वापस आ गयी।
कैलादेवी के दावे को हम पुख्ता नहीं करते, लेकिन गांव के सैकड़ों लोगों ने कैला देवी को मरे हुए देखा और फिर जिंदा देखा। यकीन कीजिए या न कीजिए, लेकिन कैला देवी का दावा है कि वह मर चुकी थी। उनके पास चार लोग आये जिनमें से एक की दाड़ी थी। कागजों का लेखा-जोखा भी देखा गया। फिर बताया गया कि इसे जीने दो। इसका वक्त बाकी है।
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कैलादेवी कहती है कि वह यमराज थे। यमराज यानी मौत के देवता। लोग इसे मजाक मानेगे, लेकिन गांव के लोग सच मान रहे हैं क्योंकि उन्होंने कैला देवी को शव-शैय्या पर पड़े देखा था और फिर उन्हें जिंदा भी देख रहे हैं।
गांव के डॉक्टर ने कैलादेवी को जिंदा रहते दवा दी थी और उनके मरने के बाद भी वह उन्हें चेक करने आये थे। लेकिन विज्ञान और प्रकृति के नियम कैला देवी के दावों के खिलाफ हैं। यह भी सत्य है कि मौत किसी को बख्शती नहीं, लेकिन इस महिला के बारे में क्या कहा जाए?
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