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पर लोग यहाँ आत्महत्या नहीं करते। यहाँ सिर्फ वे लोग ही आते हैं, जो किसी लाइलाज बीमारी से जूझ रहे होते हैं, या मरणासन्न होते हैं। पर ये लोग केवल 2 सप्ताह ही यहाँ रह सकते हैं। अगर उन्हें 2 सप्ताह में मौत नहीं आती तो उन्हें ये स्थान छोड़ना पड़ता है।
इतना ही नहीं, यहाँ लोगों के लिए सारी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। मुक्ति भवन में 12 कमरे, एक छोटा सा मंदिर और लोगों के लिए पुजारी हैं। इस हॉस्टल के मैनेजर भैरव नाथ शुक्ला के अनुसार यहाँ वे लोग ही आते हैं, जिनका इस दुनिया में और कोई नहीं है। यह होस्टल पिछले 44 सालों से लोगों की सेवा में उपलब्ध है।
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