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आज हम आपको भारत के मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ के आदिवासी इलाके में रहने वाली ऐसी ही एक आदिवासी जनजाति के बारे में बताते हैं, जहां शादी करने से पहले जानवर का खून पीना पड़ता है। यह रिवाज तो सुनने में ही बड़ा अटपटा सा लगता है। इस जनजाति का नाम गौंड है। इस जनजाति के लोग आज भी पुराने नियम कायदे का पालन करते है।
शादी के समय दूल्हा और दुल्हन का विवाह तभी माना जाता है जब दूल्हा एक जानवर को मारकर उसका खून पिएं। रस्मों के अनुसार, दूल्हा पक्ष के लोग बारात के साथ जिंदा सूअर लेकर आते हैं। आखिरी रस्म में दूल्हे को सूअर मारना पड़ता है और उसके पैर से खून पीना पड़ता है। अगर वह इस रस्म को निभाने से इंकार करता है तो यह विवाह संपन्न नहीं माना जाता।
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