साल का अंतिम चंद्र ग्रहण पंचांग के अनुसार 30 नवंबर को लगने जा रहा है। ये चंद्र ग्रहण कई मामलों में विशेष है। इस दिन कार्तिक पूर्णिमा का पर्व भी है। चंद्र ग्रहण ब्रह्मांड की एक खगोलीय घटना है और यह पृथ्वी से मीलों दूर घटित होती है, लेकिन इसके बावजूद इसका मानव जीवन पर असर होता है। सृष्टि के जीवों पर इसका असर दिखाई देता है। राशि अनुसार लोग प्रभावित होते है तो ग्रहण के दौरान निकलने वाली प्रदूषित किरणों का भी विपरीत प्रभाव मानव जीवन पर पर होता है। किसी भी ग्रहण का सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर देखा जाता है।
चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं और इसके आसपास जन्मे शिशु को जन्म देने वाली महिलाओं को विशेष सावधानी बरतना चाहिए। मान्यता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को कुछ विशेष बातों का खास ख्याल रखना चाहिए नहीं तो इस दौरान लापरवाही बरतने पर शिशु के स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। मान्यता है कि चंद्र ग्रहण गर्भवती महिलाओं के लिए अशुभ प्रभाव वाला देने वाला होता है। इसलिए ग्रहण की अवधि में इनको घर में रहने की सलाह दी जाती है।

चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सब्जी काटना, कपड़े सीना आदि कार्यों में धारदार उपकरणों का उपयोग करने से बचना चाहिए। इससे गर्भस्थ शिशु को शारीरिक दोष हो सकता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सोना, खाना पकाना, और सजना-संवरना नहीं चाहिए। ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए गर्भवती महिला को तुलसी का पत्ता जीभ पर रखकर हनुमान चालीसा और दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए। इस दौरान देव मंत्रों के उच्चारण से भी ग्रहण के दुष्प्रभाव से रक्षा होती है।
ग्रहण की समाप्ति के बाद गर्भवती महिला को पवित्र जल से स्नान करना चाहिए नहीं तो उसके शिशु को त्वचा संबधी रोग होने की संभावना होती हैं। चंद्र ग्रहण के दौरान मानसिक रूप से मंत्र जाप का बड़ा महत्व है। गर्भवती महिलाएं इस दौरान मंत्र जाप कर अपनी रक्षा कर सकती है। इससे स्वयं के और गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक और उत्तम असर पड़ता है।
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