बाबरी विध्वंस मामले में CBI स्पेशल कोर्ट के फैसले की 10 अहम बड़ी बातें


बाबरी का विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में 28 साल बाद आखिरकार फैसला आ गया। लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज एसके यादव ने 2000 पन्नों का फैसला देते हुए राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 32 आरोपियोंं को बरी कर दिया। इस केस में 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 16 की मौत हो चुकी है। फैसला सुनाने वाले जज आज ही रिटायर हो रहे हैं। जानिए फैसले की 10 अहम बड़ी बातें....


  1. इस मामले में किसी भी तरह की साजिश के सबूत नहीं मिले।
  2. ढांचा ढहाने की घटना अचानक हुई थी, यह घटना साजिशन नहीं हुई थी।
  3. अज्ञात लोगों ने विवादित ढांचा गिराया। आरोपी बनाए गए लोगों का इस घटना से लेना-देना नहीं था।
  4. सीबीआई 32 आरोपियों का गुनाह साबित करते सबूत पेश करने में नाकाम रही।
  5. गवाहों के बयानात बताते हैं कि कारसेवा के लिए जुटी भीड़ की नीयत बाबरी ढांचा गिराने की नहीं थी।
  6. अशोक सिंघल ढांचा सुरक्षित रखना चाहते थे क्योंकि वहां मूर्तियां थीं।
  7. विवादित जगह पर रामलला की मूर्ति मौजूद थी, इसलिए कारसेवक उस ढांचे को गिराते तो मूर्ति को भी नुकसान पहुंचता। कारसेवकों के दोनों हाथ व्यस्त रखने के लिए जल और फूल लाने को कहा गया था।
  8. अखबारों में लिखी बातों को सबूत नहीं मान सकते। सबूत के तौर पर कोर्ट को सिर्फ फोटो और वीडियो पेश किए गए।
  9. वीडियो टेम्पर्ड थे। उनके बीच-बीच में खबरें थीं, इसलिए इन्हें भरोसा करने लायक सबूत नहीं मान सकते।
  10. चार्टशीट में तस्वीरें पेश की गईं, लेकिन इनमें से ज्यादातर के निगेटिव कोर्ट को मुहैया नहीं कराए गए। इसलिए फोटो भी प्रमाणिक सबूत नहीं हैं।

Post a Comment

और नया पुराने