अच्छे संस्कार हैं जरूरी
चाणक्य कहते हैं कि माता-पिता का सबसे प्रमुख कर्तव्य होता है कि वो अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें। चाणक्य नीति में इस बात का जिक्र किया गया है कि बच्चों को अच्छी बातें सिखाने से उन्हें बुरे-भले का फर्क समझ में आने लगता है। साथ ही, छोटी उम्र से ही बच्चों को महापुरुषों के बारे में बताना चाहिए जिससे कि वो प्रेरणा ले सकें और समाज के लिए सदैव अच्छा कार्य करते रहें।
अनुशासन का महत्व समझाएं
कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में तभी सफलता प्राप्त कर सकता है जब उसे अनुशासन की अहमियत पता हो। चाणक्य के अनुसार अनुशासित व्यक्ति का जीवन समय की तरह पाबंद होता है और जो इंसान समय की कद्र करता है, उसे कामयाबी हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता है। अपनी नीति पुस्तक में आचार्य कहते हैं कि बचपन से ही बच्चों में अनुशासन की भावना पैदा करनी चाहिए। इससे उनकी जीवन शैली में भी सुधार आएगा। न केवल करियर की दृष्टि से बल्कि एक अनुशासित व्यक्ति की सेहत भी दूसरों की तुलना में बेहतर रहती है।
सच्चाई के पथ पर चलने को करें प्रेरित
चाणक्य के अनुसार एक सच्चा व्यक्ति हर परेशानी का सामना अच्छे से कर सकता है। उसे किसी बात का भय नहीं होता है। वो कहते हैं कि माता-पिता को बच्चों को शुरू से ही सच्चाई का महत्व बताना चाहिए। सच्चाई के रास्ते पर चलने से, किसी भी व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने से रोका नहीं जा सकता है। आचार्य के मुताबिक इसके अलावा, लालच, जलन-ईर्ष्या, झूठ, आलस्य और चालाकी जैसे अवगुणों से भी बच्चों को दूर रखना चाहिए।

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