रूस की पहली कोरोना वैक्सीन पर WHO ने कही ये बड़ी बातें


पूरी दुनिया को पीछे छोड़ रूस सबसे आगे निकल गया है। दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन अप्रूव हो गई है। रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को यह ऐलान किया। उन्‍होंने कहा कि रूस में बनी पहली कोविड-19 वैक्‍सीन को हेल्‍थ मिनिस्‍ट्री से अप्रूवल मिल गया है। पुतिन ने यह भी बताया कि उनकी बेटियों को यह टीका लगाया जा चुका है।

दिलचस्प बात ये है कि रूस ने खुद कहा है कि उत्पादन के साथ-साथ वैक्सीन के फेज-3 का क्लीनिकल ट्रायल जारी रहेगा। रूस के वैक्सीन बनाने के दावे से जहां एक तरफ खुशी है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे लेकर संदेह जाहिर कर चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस से वैक्सीन उत्पादन के लिए बनाई गई गाइडलाइन का पालन करने के लिए कहा है। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर से यूएन प्रेस ब्रीफिंग के दौरान सवाल किया गया था कि अगर किसी वैक्सीन का फेज 3 का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है तो क्या संगठन इसे खतरनाक करार देगा?


रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने एक बातचीत में कहा था कि वैक्सीन नि:शुल्क होगी और सबसे पहले इसे डॉक्टर्स और अध्यापकों को दिया जाएगा। रूसी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि उत्पादन के साथ-साथ वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल भी जारी रहेगा और इसमें सुधार की कोशिश की जाएगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने कहा, 'जब भी ऐसी खबरें आएं या ऐसे कदम उठाए जाएं, हमें सतर्क रहना होगा। ऐसी खबरों के असली अर्थ को सावधानी के साथ पढ़ा जाना चाहिए।'  क्रिस्टियन लिंडमियर ने कहा, "कई बार ऐसा होता है कि कुछ शोधकर्ता दावा करते हैं कि उन्होंने कोई महत्वपूर्ण खोज कर ली है जो वाकई में अच्छी खबर होती है। लेकिन कोई खोज करने या वैक्सीन के असरदार होने के संकेत मिलने और क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों से गुजरने में जमीन-आसमान का फर्क होता है। हमें आधिकारिक तौर पर अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। अगर आधिकारिक तौर पर कुछ होता तो यूरोप के हमारे ऑफिस के सहयोगी जरूर इस मामले पर ध्यान देते।"


विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि एक सुरक्षित वैक्सीन बनाने को लेकर कई नियम बनाए गए हैं और इसे लेकर एक गाइडलाइन भी है। इन नियमों और गाइडलाइन का पालन किया जाना जरूरी है ताकि हम जान सकें कि कोई वैक्सीन या इलाज कितना असरदार है और किस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, गाइडलाइन का पालन करने से हमें ये भी पता चलता है कि क्या किसी इलाज या वैक्सीन के साइड इफेक्ट हैं या फिर कहीं इससे फायदे से ज्यादा नुकसान तो नहीं हो रहा है।

बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी थी कि वैक्सीन बनाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। वैक्सीन ट्रायल में जरा सी चूक से लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हो सकता है। हालांकि, कोरोना महामारी से जारी तबाही के बीच कई देश जल्द से जल्द वैक्सीन लाने की कोशिशें कर रहे हैं।

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