राजस्थान के बाद अब इस राज्य के वरिष्‍ठ नेता ने दी कांग्रेस पार्टी छोड़ने की चेतावनी


राजस्थान में अंदरूनी लड़ाई से परेशान कांग्रेस के लिए एक मोर्चा बिहार में भी खुलता दिखाई दे रहा है। पार्टी के नेता कैलाश पाल नेे कांग्रेस छोड़ने की चेतावनी दी है। फिलहाल उन्‍होंने पार्टी के पदों से इस्‍तीफा दिया है। उन्‍होंने जनसत्‍ता.कॉम से कहा कि अगर पार्टी नेतृत्‍व ने उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं की तो वह प्राथमिक सदस्‍यता से भी त्‍यागपत्र दे देंगे। उनका दावा है कि नेतृत्‍व के रुख से पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग के कई नेता असंतुष्‍ट हैं और अगर रुख नहीं बदला तो उनके भी इस्‍तीफे हो सकते हैं।

कैलाश पाल का पार्टी नेतृत्‍व पर आरोप है कि पिछड़ी जातियों को नजरअंदाज कर अगड़ी जातियों पर ज्‍यादा ध्‍यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि संगठन में भी सारे बड़े पद अगड़ी जातियों के नेताओं के पास ही हैं और विधानपरिषद व राज्‍यसभा चुनावों में टिकट भी अगड़ी जातियों को ही दिया गया। कैलाश पाल बिहार प्रदेश कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष भी रह चुके हैं और फिलहाल प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी समिति (वर्किंग कमेटी) में हैं। इस पद से उन्‍होंने आठ जुलाई को इस्‍तीफा दिया है, लेकिन यह स्‍वीकार या अस्‍वीकार नहीं हुुुुआ है।

पाल का कहना है कि पिछड़ों और अति पिछड़ों की अनदेखी के चलते ही आज पार्टी हाशिये पर है। उनका यह भी कहना है कि अगर अगड़ी जातियों को परंपरागत वोट बैंक बचाने और बढ़ाने के मकसद से बढ़ावा दिया जा रहा है तो फिर राजद से गठबंधन का क्‍या औचित्‍य है? राजद से गठबंधन रहते अगड़ी जातियों के लोग पार्टी से कैसे जुड़ सकते हैं? 2015 में महागठबंधन की सरकार में मंत्री बनने से लेकर हालिया राज्‍यसभा चुनाव तक अगड़ी जाति के नेताओं को ही ज्‍यादा महत्‍व दिया गया।

पाल काफी समय से नाराज बताए जा रहे हैं। उन्‍होंने 8 जुलाई को प्रदेश अध्‍यक्ष मदन मोहन झा को इस्‍तीफे की पेशकश की थी। इसमें उन्‍होंने पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियों की महत्‍वाकांक्षा को उचित स्‍थान नहीं दिए जाने को कारण बताया था। साथ ही, कहा था कि पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए समय के साथ बदलना जरूरी है।

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