नवरात्रि का पर्व बहुत ही पावन पर्व है।नवरात्रि के सात दिन पूरे हो चुके हैं। अब महाअष्टमी और नवमी की पूजा ही शेष रह गई है। नवरात्रि की पूजा की दृष्टि से ये दो दिन मां की पूजा के विशेष दिन होते हैं। जिस प्रकार से अभी तक पूजा करते आए हैं उसी प्रकार से आगे भी पूजा जारी रखनी चाहिए। धैर्य नहीं खोना चाहिए। इन बातों का विशेष ध्यान रखना है।
मान्यता के अनुसार, जिन घरों में मां की चौकी और घटस्थापना की गई है। वहां का वातावरण पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ध्यान रहें मां दुर्गा को स्वच्छता बहुत प्रिय है। जो लोग स्वच्छता को अपनाते हैं मां उनसे प्रसन्न रहती हैं।
भूलकर भी ये कार्य न करें - जो लोग व्रत हैं उन्हें विशेष संयम बरतना चाहिए। व्रत के दिनों में जमीन पर ही बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए। उन सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए जिससे नवरात्रि की पूजा भंग न हो।
काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या से बचें -नवरात्रि में मनुष्य को हर प्रकार की बुराई से बचना चाहिए। मन को शुद्ध रखकर मां का ध्यान लगाना चाहिए। मन में अच्छे विचार लाएं।



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