एक रिपोर्ट के अनुसार बर्थमार्क दो तरह के होते हैं। वस्कुलर और पिगमेंटेड। डॉक्टर्स के मुताबिक पिगमेंटेड बर्थमाक्र्स स्किन के किसी एक एरिया में मेलनिन की अधिक मात्रा की वजह से होते हैं। इन्हें मोल्स मंगोलियन स्पॉट्स कहा जाता है और ये अडोलेसेन्स में गायब हो जाते हैं। वैसे इनसे आमतौर पर कोई खतरा नहीं होता है। लेकिन फिर भी डॉक्टर के पास एक बार जाकर जरूर दिखा लेना चाहिए।
वहीं वस्कुलर बर्थमार्क का सबसे अहम बात यह है कि ये स्ट्रोक बाइट स्पाइडर वेन्स की तरह होता है और कई सारे बच्चे ऐसे जो इनके साथ ही पैदा होते हैं। 18 महीने पूरे हो जाने के बाद ये बर्थमार्क हट जाता है।
वैसे बर्थमाक्र्स को लेकर कई लोगों की ऐसी सोच बनी हुई है कि यदि किसी गर्भवती महिला को गर्भावस्था में कोई स्ट्रॉन्ग इमोशन महसूस हो और बॉडी के किसी खास हिस्से को छुए तो उसके बच्चे को शरीर की उसी जगह पर बर्थमार्क हो जाता है। वहीं ज़्यादातर बर्थमार्क्स से शरीर को कोई हानि नहीं होती और ज़्यादातर बर्थमार्क्स के लिए ट्रीटमेंट की भी ज़रूरत नहीं होती।
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