सिक्योरिटी फर्म लैब्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस CamScanner एप में मैलवेयर (वायरस) है, हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कैमस्कैनर एप कोई मैलवेयर एप नहीं है और ना ही यह आपके फोन में कोई वायरस वाला एप इंस्टॉल करता है लेकिन पिछले कुछ महीने में कंपनी ने एप को ऑप्टिमाइज किया है।
ऐसे में विज्ञापनदाताओं को कंपनी ने इन-एप परचेज का विकल्प दिया है, हालांकि इससे भी अभी तक कोई समस्या नहीं थी, लेकिन कैमस्कैनर के नए वर्जन की एडवरटाइजिंग लाइब्रेरी में एक मैलवेयर मॉड्यूल है जिसकी पहचान Trojan-Dropper.AndroidOS.Necro.n के रूप में हुई है।यह मैलवेयर आपके फोन में वायरस वाले एप डाउनलोड्स कर सकता है। साथ ही यह आपसे विज्ञापन के जरिए पैसे भी मांग सकता है।
वहीं इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भी गूगल ने प्ले-स्टोर से इस एप को अभी तक नहीं हटाया है।बता दें कि गूगल ने हाल ही में प्ले-स्टोर की एप पब्लिशिंग पॉलिसी में कुछ बदलाव किए हैं। नए नियम के मुताबिक कोई भी डेवलपर तुरंत एप पब्लिश नहीं कर सकता है। गूगल ने इसके लिए तीन का एप्रूवल समय तय किया है।




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